चौटाला परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर दिग्विजय चौटाला ने सोशल मीडिया पर छेड़ी नई जंग
लिखा, अब इनेलो नेता इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं, कांग्रेस पर भी साधा निशाना

सत्य खबर हरियाणा
Haryana Politics : आजादी के बाद से हरियाणा की राजनीति में देवीलाल परिवार का अहम योगदान रहा है। आजादी के बाद 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में चौधरी देवीलाल विधायक बनने में सफल हुए थे वह उसके बाद 1957 और 1962 में भी पंजाब विधानसभा के सदस्य रहे। एक नंबर 1966 को हरियाणा का गठन हुआ हरियाणा के गठन में भी देवीलाल की अहम भूमिका रही। हरियाणा के गठन के बाद देवीलाल हरियाणा की राजनीति में सक्रिय हुए और वह लगातार चुनाव लड़ते और जीते रहे 1971 तक उन्होंने कांग्रेस में अपना योगदान दिया लेकिन इसके बाद 1972 में वह भजनलाल और बंसीलाल दोनों से नाराज हो गए और उन्होंने आदमपुर और तोशाम दोनों ही सीटों से निर्दलीय पर्चा भर दिया हालांकि वह दोनों सीटों पर चुनाव हार गए। लेकिन हरियाणा की राजनीति में उनका कद कम नहीं हुआ।

देवीलाल के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को ओमप्रकाश चौटाला ने संभाला हालांकि देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला, प्रताप चौटाला और जगदीश चौटाला भी थे लेकिन देवीलाल की राजनीतिक विरासत को ओमप्रकाश चौटाला ने आगे बढ़ाने का काम किया।
ओम प्रकाश चौटाला के रहते हुए ही अजय चौटाला और अभय चौटाला में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता शुरू हो गई थी और अजय चौटाला ने अलग पार्टी का गठन कर लिया था जिसका नाम देवीलाल के नाम पर जननायक जनता पार्टी रखा गया। 2019 के विधानसभा चुनाव में दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में जेजेपी को ठीक-ठाक सफलता भी मिली लेकिन 2024 में उनकी पार्टी जीरो पर आ गई। वर्तमान में ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र करण चौटाला हरियाणा विधानसभा के सदस्य हैं। वर्तमान में देवीलाल परिवार की कहे या ओमप्रकाश चौटाला के परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर दुष्यंत चौटाला और अभय चौटाला ने काफी रस्साकस्सी चलती रही है हालांकि बीच में एक बार दोनों भाइयों और उनके परिवारों को एक करने का प्रयास भी हुआ लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ पाया।
इन दिनों जजपा हिसार पुलिस के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई लड़ रही है। इसी लड़ाई को लेकर अजय चौटाला के छोटे बेटे दिग्विजय चौटाला ने फेसबुक पोस्ट के जरिए चौटाला परिवार की राजनीतिक विरासत और मौजूदा सियासी हालात को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने लिखा कि चौधरी देवीलाल की राजनीति का सबसे बड़ा सिद्धांत था कि कार्यकर्ता की मुश्किल में सबसे पहले उसके साथ खड़ा हुआ जाए।
दिग्विजय ने मौजूदा घटनाक्रम को लेकर इनेलो पर निशाना साधते हुए संकेत दिए कि अब इनेलो नेता इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। चर्चा है कि ऊपर से चुप्पी के निर्देश हैं और मामले को जल्द ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी चल रही है।
साथ ही कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि विपक्ष भी फिलहाल दूरी बनाए नजर आ रहा है। ऐसे में दिग्विजय ने साफ तौर पर दुष्यंत चौटाला को संघर्ष के केंद्र में रखा। समर्थकों के मुताबिक, जब कार्यकर्ता पर संकट आता है तो दुष्यंत ही खुलकर मैदान में उतरते हैं।
अब चौटाला परिवार की विरासत, कार्यकर्ता सम्मान और राजनीतिक साहस को लेकर हरियाणा की सियासत में नई चर्चा छिड़ गई है। दुष्यंत चौटाला ने अपनी इस पोस्ट से पहले एक और पोस्ट भी अपने फेसबुक पर की थी, शेरों-शायरी के अंदाज में की गई इस पोस्ट में उन्होंने कहा,
कुछ लोग खुशियां मना रहे थे, हरियाणा की कानून व्यवस्था के निकले जनाजे पर।
रोना मत जब कल को आ जाए, यह गुंडे तुम्हारे दरवाजे पर।
माना यह भी जाता है कि यह पोस्ट भी उन्होंने अपने विरोधियों और विशेष तौर पर अपने परिवार के ही अपने विरोधियों को निशाने पर लेते हुए कही। जेजेपी जहां इस लड़ाई को अब तक कानून और राजनीतिक रूप से लड़ रही थी वहीं दिग्विजय चौटाला ने इस लड़ाई को अब सोशल मीडिया पर लाकर नया संदेश देने का काम किया है। उनकी दोनों पोस्टों को उनके समर्थकों ने काफी लाइक भी किया है। करीब 17 घंटे पहले की गई पोस्ट को 1400 लोगों ने लाइक किया है और इस पर 275 कमेंट आए हैं और 65 लोगों ने इसे शेयर किया है।
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